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Jai ho

भगवान शिव — आदि योगी, संहारक, करुणा के सागर, और शून्य के स्वामी। वे न तो शुरू हैं, न अंत। उनका स्वरूप है सदा शांत, फिर भी भीतर छुपा है अपार तांडव। वे एक ही समय पर गृहस्थ हैं और सन्यासी भी, भोग और योग का अद्भुत संगम।
उनकी आंखें बंद हों तो ध्यान; खुली हों तो कृपा।
ध्यान की शक्ति:
शिव की सबसे गूढ़ शक्ति है मौन ध्यान। वे योग में स्थित हैं, पर हर जीव की हलचल को जानते हैं। उनका ध्यान व्यक्ति को आत्म-चेतना तक ले जाता है।
तांडव – विनाश की नहीं, परिवर्तन की शक्ति:
जब शिव तांडव करते हैं, तो वह केवल नाश नहीं, नव निर्माण का संदेश होता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में परिवर्तन ही शाश्वत है।
नीलकंठ – विष पीकर भी शांत:
उन्होंने समुद्र मंथन का विष पीकर संसार को बचाया। यह दर्शाता है – त्याग, संयम, और कर्तव्य की चरम पराकाष्ठा।
भस्म और शव पर बसे शिव:
वे भस्म लगाते हैं, श्मशान में रहते हैं – ये हमें सिखाता है कि मृत्यु भी जीवन का हिस्सा है, और अहंकार का अंत निश्चित है।
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