kamaltiwari8954@gmail.com

आदित्य हृदय स्तोत्र: सम्पूर्ण पाठ हिंदी अर्थ सहित

आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ – Aditya Hridaya Stotra in Hindi ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को सरकारी नौकरी, उच्च पद, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान आदि का कारक माना जाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति प्रबल होती है। ऐसे जातक की कुंडली में सरकारी नौकरी के योग बनते हैं। कुंडली में सूर्य ग्रह को…

Read More

श्री कालभैरवाष्टकम् Kalabhairava Ashtakam

कालभैरव अष्टकम: आध्यात्मिक महत्व भगवान शिव के अनेक रूप और अवतार हुए हैं (रूप जिसमें कोई देव/ देवी शरीर रूप में प्रकट होते हैं)। यद्यपि एक योगी के रूप में उनकी मूल छवि को श्रद्धापूर्वक सर्वत्र पूजा जाता है, तथापि उनके पशुपति नाथ और विश्वनाथ के रूप में अवतार भी बहुत प्रसिद्ध हैं। किंतु भगवान…

Read More

श्री हरि स्तोत्रम | Shri Hari Stotram Lyrics

श्री हरि स्तोत्रम भगवान विष्णु का एक शक्तिशाली मंत्र है। इस Shri hari stotram lyrics का पाठ स्वामी ब्रह्मानन्दं द्वारा किया गया  है। इसका पाठ करने से आप भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करते हैं। आप स्वयं इस श्री हरि स्तोत्रम लिरिक्स के द्वारा पाठ करके श्री विष्णु जी आशीर्वाद प्राप्त करते है…

Read More

Shri Satyanarayana Ashtottarashata Namavali (108 names)

श्री सत्यनारायणाष्टोत्तर शतनामावली ॐ सत्यदेवाय नमः । ॐ सत्यात्मने नमः । ॐ सत्यभूताय नमः । ॐ सत्यपुरुषाय नमः । ॐ सत्यनाथाय नमः । ॐ सत्यसाक्षिणे नमः । ॐ सत्ययोगाय नमः । ॐ सत्यज्ञानाय नमः । ॐ सत्यज्ञानप्रियाय नमः । ९ ॐ सत्यनिधये नमः । ॐ सत्यसम्भवाय नमः । ॐ सत्यप्रभुवे नमः । ॐ सत्येश्वराय नमः…

Read More

शाखोच्चार के श्लोक

विवाह के समय बोले जाने वाले शाखोच्चार के श्लोक कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्ष: स्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु: करे कंकणं॥  सर्वांगे हरि चन्दनं सुललितं कंठे च मुक्तावली। गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते गोपाल चूडामणि:॥ रुक्मणी कृष्ण सौभाग्यम्-उमा सौभाग्य शंकरः । जानकीराम सौभाग्यं सौभाग्यं वर कन्ययोः ।। आयुष्मान् भव सौम्य, आयुष्मती भव सुभगे ।। योऽसौ विघ्न विनाशनो गजमुखों सर्वार्थ…

Read More

श्री रुद्राष्टकम् (Shri Rudrashtakam)

॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥ नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं…

Read More