बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है? जानिए पूजा विधि और महत्व

🌼 बसंत पंचमी 2026: ज्ञान, संगीत और नई शुरुआत का पर्व 🌼

बसंत पंचमी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन माँ सरस्वती को समर्पित होता है, जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, विद्या और कला की देवी माना जाता है।

🌸 बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी से ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है। ठंडी सर्दियों के बाद प्रकृति में हरियाली और रंग-बिरंगे फूल दिखाई देने लगते हैं। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, जो खुशी, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है।

बसंत पंचमी का भारतीय पौराणिक परंपरा में विशेष स्थान है। यह पर्व मुख्य रूप से माँ सरस्वती, भगवान विष्णु और सृष्टि की रचना से जुड़ी कथाओं से संबंधित है।

📜 1. माँ सरस्वती का प्राकट्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि की रचना के बाद चारों ओर नीरवता थी, तब ब्रह्मा जी ने अनुभव किया कि संसार में वाणी और ज्ञान का अभाव है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ।
माँ सरस्वती के वीणा वादन से संसार में शब्द, संगीत, बुद्धि और ज्ञान का संचार हुआ। माना जाता है कि यह प्राकट्य माघ शुक्ल पंचमी के दिन हुआ, इसलिए यह तिथि बसंत पंचमी के रूप में पूजनीय है।

📖 2. विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी

माँ सरस्वती को विद्या, बुद्धि, वाणी, संगीत और कला की देवी माना गया है। इस दिन उनकी पूजा करने से ज्ञान, एकाग्रता और विवेक की प्राप्ति होती है—ऐसी पौराणिक मान्यता है।

🕉️ 3. भगवान विष्णु से संबंध

कुछ पुराणों में वर्णन मिलता है कि माँ सरस्वती भगवान विष्णु की शक्ति हैं। बसंत पंचमी के दिन विष्णु जी और लक्ष्मी जी के साथ सरस्वती जी की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है।

🌼 4. बसंत ऋतु और कामदेव

पौराणिक दृष्टि से बसंत ऋतु को कामदेव की ऋतु कहा गया है। बसंत पंचमी के बाद कामदेव का प्रभाव बढ़ता है, जिससे सृष्टि में प्रेम, सौंदर्य और सृजन का संचार होता है।

✍️ 5. विद्यारंभ की परंपरा

शास्त्रों में बसंत पंचमी को विद्यारंभ के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इसी कारण बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान इसी दिन कराया जाता है, जो पौराणिक परंपरा से जुड़ा है।

सरस्वती पूजा मंत्र | Saraswati Puja Mantra

1. सरस्वती ध्यान मंत्र
ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् ।
हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ ।।

2. परीक्षा में सफलता के लिए मंत्र
नमस्ते शारदे देवी, काश्मीरपुर वासिनी,
त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्या दानं च देहि में,
कंबू कंठी सुताम्रोष्ठी सर्वाभरणंभूषिता,
महासरस्वती देवी, जिव्हाग्रे सन्नी विश्यताम् ।।
शारदायै नमस्तुभ्यं , मम ह्रदय प्रवेशिनी,
परीक्षायां समुत्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।।

3. सरस्वती मंत्र विद्यार्थियों के लिए
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

4. सरस्वती मंत्र बुद्धि वृद्धि के लिए
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ।

5. सरस्वती मंत्र धन और बुद्धि के लिए
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।

6. विद्या और ज्ञान बढ़ाने के लिए सरस्वती मंत्र
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने ।
विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते ॥

7. विद्या प्राप्ति के लिए

सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:।
वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च।।
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने।
विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।।

8. माता सरस्वती से विद्या के वरदान के लिए

ॐ शारदा माता ईश्वरी मैं नित सुमरि तोय हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥

जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शङ्कर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही सम्पूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती हमारी रक्षा करें।

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥

शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिन्तन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अँधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान् बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलङ्कृत, भगवती शारदा (देवी सरस्वती) की मैं वन्दना करता हूँ।

हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥
अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान्‌ बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूं ॥2॥

सरस्वती वंदना- हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
 
जग सिरमौर बनाएं भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
 
साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमय कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
 
लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा मां,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

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