पूजा के समय नित्य बोले जाने श्लोक Daily Mantra

श्री गणेश ध्यान मंत्र

गजाननं भूतगणाधिसेवितं
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारणं
नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

ॐ सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः.
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः.
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा.संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥

नमो गणेभ्यो गणपतिभ्यश्च वो नमो नमो
व्रातेभ्यो व्रातपतिभ्यश्च वो नमो।
नमो गृत्सेभ्यो गृत्सपतिभ्यश्च वो नमो नमो
विरूपेभ्यो विश्वरूपेभ्यश्च वो नमो:।।

भगवान विष्णु ध्यान मंत्र

मंगलम भगवान् विष्णु मंगलम गरुड़ध्वजः | मंगलम पुन्डरी काक्षो मंगलायतनो हरि ||
 
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
 
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
 
 सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् ।
सहारवक्षस्स्थलशोभिकौस्तुभं नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥
 
शशङ्खचक्रं साकिरीत्कुण्डलं सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् ।
सहर्वक्षस्थलशोभिकौस्तुभं नमामि विष्णुं शीर्ष चतुर्भुजम् ॥

भगवान शंकर ध्यान मंत्र 

ध्याये नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचंद्रां वतंसं।
रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम।।
पद्मासीनं समंतात् स्तुततममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं।
विश्वाद्यं विश्वबद्यं निखिलभय हरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।
 
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
 
कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥
 
मंदार माला कलितालकायै
कपालमालंगित सुन्दराय
दिव्याम्बरायै  च दिगम्बराय 
नमः शिवायै च नमः शिवाय .
शान्ताकारं शिखरं शयनं नीलकण्ठ सुरेशं, विश्वाधारं स्फटिक सहृषं शुभ्रवर्ण शुभागमं,
गौरी कान्तं त्रितनयनं योगी मिर्ध्या नागम्यं, वंदे शंभु भवभैहरं सर्व लोकेकैकथानम्॥
 

माँ दुर्गा ध्यान मंत्र

ॐ जयन्ती मंगला काली
भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री
स्वाहा स्वधा नमोस्तुते

ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
 
खड्गं चक्र-गदेषु-चाप-परिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिर: शंखं संदधतीं करौस्त्रिनयनां सर्वाड्गभूषावृताम्।
नीलाश्म-द्युतिमास्य-पाददशकां सेवे महाकालिकां यामस्तौत्स्वपिते हरौ कमलजो हन्तुंमधुं कैटभम्॥

सूर्य देव ध्यान मंत्र

ॐ ध्येय सदा सवित्र मण्डल मध्यवर्ति।
नारायण सरसिजसनसन्निविष्टः।
केयुरवन मकरकुंडलवान किरीटी।
हारी हिरण्मय वपु: धृतशंखचक्रः।।
 
एहि सूर्य! सहस्त्रांशो! तेजो राशे! जगत्पते!
अनुकम्प्यं मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर 
नमोस्तु सूर्यायः नमोस्तु भानवे नमोस्तु वैश्वानरजात वेदसे
ममैत अर्घ्यम प्रतिगृहदेव देवादि देवाय नमो नमस्ते
 
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् 
 
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम । तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम ।।
 
ॐ आदित्याय विदमहे प्रभाकराय धीमहितन्न: सूर्य प्रचोदयात् 
 
ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।
हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन।।

नित्य बोले जाने वाले श्लोक” वे संस्कृत मंत्र या स्तुति श्लोक होते हैं जो हिंदू धर्म में प्रतिदिन की दिनचर्या, पूजा, या आराधना के समय बोले जाते हैं। इन श्लोकों का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, मन की शांति, ईश्वर का स्मरण और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ये श्लोक बच्चों को सिखाए जाते हैं ताकि वे बचपन से ही संस्कार, श्रद्धा और आत्मिक अनुशासन से जुड़ें।

नित्य बोले जाने वाले श्लोकों का उद्देश्य:

  1. प्रभु स्मरण – दिन की शुरुआत में ईश्वर का नाम लेने से सकारात्मकता बनी रहती है।

  2. कृतज्ञता – माता-पिता, गुरु, प्रकृति और ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करने का माध्यम।

  3. मानसिक शांति – श्लोकों का उच्चारण मन को स्थिर और शांत करता है।

  4. संस्कृति से जुड़ाव – भारतीय संस्कृति और वेद-पुराणों के ज्ञान से जुड़ाव।

कुछ सामान्य नित्य श्लोक:

  1. कराग्रे वसते लक्ष्मीः…
    सुबह उठते ही हाथ देखने का श्लोक
    “कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
    करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥”

  2. गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः…
    गुरु वंदना
    “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
    गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥”

  3. सर्वे भवन्तु सुखिनः…
    सभी के कल्याण की कामना
    “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
    सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥”

  4. त्वमेव माता च पिता त्वमेव…
    ईश्वर को सर्वस्व मानने वाला श्लोक
    “त्वमेव माता च पिता त्वमेव
    त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
    त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
    त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥”

निष्कर्ष:

नित्य श्लोक न केवल धार्मिक क्रियाओं का हिस्सा हैं, बल्कि वे दैनिक जीवन में शुद्ध विचार, श्रद्धा और अनुशासन को भी प्रेरित करते हैं। इनका नियमित जप व्यक्ति के मानसिक, आत्मिक और सामाजिक जीवन को संतुलित करता है।

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